What is Chandrayaan-2

चंद्रयान-2 को भारत के सबसे ताकतवर जीएसएलवी मार्क-III रॉकेट से लॉन्च किया गया। इस रॉकेट में तीन मॉड्यूल ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) हैं। इस मिशन के तहत इसरो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर को उतारने की योजना है।

Chandrayaan 2 Highlight-

  • चंद्रयान-2 भारत के सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी एमके-III से लॉन्च हुआ
  • चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल
  • लॉन्च के 48 दिन बाद यान चंद्रमा की सतह पर पहुंचेगा
  • अंतरिक्ष की दुनिया में भारत का इतिहास
  • इसरो ने लॉन्च किया चंद्रयान-2
  • सोमवार दोपहर 2 बजकर 43 मिनट पर लॉन्च हुआ मिशन
  • दुनियाभर में बजा हिंदुस्तान का डंका
  • 48 दिनों में चांद पर पहुंचेगा चंद्रयान-2

गौरवशाली इतिहास का खास पल बोले- PMमोदी

चंद्रयान-2 लॉन्चिंग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह देश के गौरवशाली इतिहास का सबसे खास पल बनेगा। यान की कामयाब लॉन्चिंग वैज्ञानिकों की अथक मेहनत और 130 करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति के कारण हुई। यह विज्ञान के नए आयाम खोलेगा। आज हर भारतीय गर्व महसूस कर रहा होगा।

चंद्रयान-2 मिशन क्या है? यह चंद्रयान-1 से कितना अलग है?

चंद्रयान-2 वास्तव में चंद्रयान-1 मिशन का ही नया संस्करण है। इसमें ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं। चंद्रयान-1 में सिर्फ ऑर्बिटर था, जो चंद्रमा की कक्षा में घूमता था। चंद्रयान-2 के जरिए भारत पहली बार चांद की सतह पर लैंडर उतारेगा। यह लैंडिंग चांद के दक्षिणी ध्रुव पर होगी। इसके साथ ही भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर यान उतारने वाला पहला देश बन जाएगा।

ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर क्या काम करेंगे?-

चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद ऑर्बिटर एक साल तक काम करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी और लैंडर के बीच कम्युनिकेशन करना है। ऑर्बिटर चांद की सतह का नक्शा तैयार करेगा, ताकि चांद के अस्तित्व और विकास का पता लगाया जा सके। वहीं, लैंडर और रोवर चांद पर एक दिन (पृथ्वी के 14 दिन के बराबर) काम करेंगे।

लैंडर यह जांचेगा कि चांद पर भूकंप आते हैं या नहीं। जबकि, रोवर चांद की सतह पर खनिज तत्वों की मौजूदगी का पता लगाएगा।

Chandrayaan-2 Facts Hindi-

19 अगस्त को ही यह चांद की कक्षा में पहुंचेगा. इसके बाद 13 दिन यानी 31 अगस्त तक वह चांद के चारों तरफ चक्कर लगाएगा. Chandrayaan-2 अंतरिक्ष यान 22 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाएगा. इसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा करेगा.

फिर 1 सितंबर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा. 5 दिन की यात्रा के बाद 6 सितंबर को विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा. लैंडिंग के करीब 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान लैंडर से निकलकर चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा

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